GDP Kya Hai – जीडीपी का फुल फॉर्म और कैसे बनती है? पूरी जानकारी

GDP Kya Hai : दुनिया के अधिकतर देशों के द्वारा अपने देश की विकास दर को नापने के लिए जीडीपी शब्द का इस्तेमाल किया जाता है। ज़ीडीपी शब्द का पहली बार इस्तेमाल आज से तकरीबन 75 साल पहले किया गया था, ऐसा कहा जाता है।

जीडीपी से प्राप्त आंकड़े का विश्लेषण करके इस बात की जानकारी प्राप्त की जाती है कि कौन से देश में विकास की रफ्तार क्या है? जो देश जितनी अच्छी जीडीपी की दर प्राप्त करती है समझ लीजिए वह देश उतनी तेजी से विकास कर रहा है।

जीडीपी सभी देशों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होती है। इस आर्टिकल में आज हम चर्चा करेंगे की “जीडीपी क्या है” और “जीडीपी का फुल फॉर्म क्या है?”

जीडीपी क्या है? (What is GDP in Hindi)

साल 1935-1944 के बीच पहली बार अमेरिकन अर्थशास्त्री साइमन के द्वारा GDP शब्द का इस्तेमाल किया गया था।

जब इस शब्द का इस्तेमाल किया गया था तब उस समय दुनिया की बड़ी-बड़ी बैंकिंग इंस्टीट्यूट देश की आर्थिक तरक्की को मापने पर लगातार काम कर रही थी, परंतु उस टाइम तक ऐसा कोई भी पैरामीटर तय नहीं था जिसके द्वारा देश के आर्थिक विकास को आसानी से समझ सके और दूसरों को समझा सके।

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परंतु अमेरिका की संसद में जब इकोनॉमिस्ट्स साइमन के द्वारा GDP शब्द का इस्तेमाल किया गया और जीडीपी शब्द के बारे में कई बातें बताई गई तो लोग उनकी बात से सहमत हुए।

इसके पश्चात अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के द्वारा GDP शब्द का इस्तेमाल किया जाना प्रारंभ किया गया और धीरे-धीरे दुनिया के अधिकतर देश आर्थिक डेवलपमेंट कैलकुलेशन करने के लिए जीडीपी शब्द का इस्तेमाल करने लगे।

GDP का फुल फॉर्म क्या है?

GDP का फुल फॉर्म GROSS DOMESTIC PRODUCT होता है जबकि हिंदी भाषा में सकल घरेलू उत्पाद कहते हैं। जीडीपी का इस्तेमाल किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को नापने के लिए होता है।

इसे आसान भाषा में समझाया तो मान लीजिए हमारे भारत देश में जो सेवाएं और वस्तु पैदा हो रही है उसकी कीमत अगर ज्यादा है तो हमारे देश में विदेशी करेंसी अधिक आएगी। जिसकी वजह से हमारा देश तेज गति के साथ विकास करेगा परंतु अगर पैदा हुई वस्तु और सर्विस की कीमत कम है तो यह देश की तरक्की के लिए सही नहीं माना जाता है।

जीडीपी कैसे बनती है?

किसी भी देश की जीडीपी बनाने के लिए या फिर जीडीपी निकालने के लिए नीचे दिए गए फार्मूले का इस्तेमाल किया जाता है। नीचे दिए गए फार्मूले का इस्तेमाल करने के पश्चात एक नंबर प्राप्त होता है, उसे ही जीडीपी माना जाता है।

GDP=C+I+G+(X-M)

C= Consumer

Expenditure( उपभोक्ता खर्च)

I= industries investment (उद्योग निवेश)

G= government

Expenditure (सरकारी खर्च)

X=export (निर्यात)

I=import (आयात)

जीडीपी के प्रकार

जिस प्रकार समय गुजरता जाता है वैसे वैसे ही देश में उभरने वाली सेवाओं और वस्तुओं की कीमत में भी बदलाव होता रहता है। इसी वजह से जीडीपी कैलकुलेशन करना थोड़ा सा मुश्किल हो जाता है। इसलिए टैक्स के अंतर्गत कई इनडायरेक्ट और औसत कैलकुलेशन की जाती है। ग्रॉस डॉमेस्टिक प्रोडक्ट के मुख्य तौर पर 2 प्रकार है जो निम्नानुसार है।

वास्तविक जीडीपी

इसे अंग्रेजी भाषा में रियल जीडीपी कहा जाता है। किसी भी देश की जीडीपी जब निकाली जाती है तो एक आधार वर्ष को तय किया जाता है और उस वर्ष में प्रोडक्ट और सर्विस की कीमत को फिक्स मान कर के चला जाता है। इस प्रकार की जीडीपी को रियल ग्रॉस डॉमेस्टिक प्रोडक्ट कहते हैं।

अवास्तविक जीडीपी

इसे अनरियलिस्टिक जीडीपी कहते हैं। जब किसी भी कंट्री की जीडीपी को निकाला जाता है तो वर्तमान मार्केट कीमत को आधार बनाया जाता है और फिर उसी कीमत के आधार पर ही ग्रॉस डॉमेस्टिक प्रोडक्ट की स्टडी की जाती है। इस प्रकार से ऐसी जो जीडीपी होती है उसे वास्तविक जीडीपी कहते हैं।

जीडीपी के लाभ क्या है?

जीडीपी के फायदे कंपनियों को भी होते हैं, निवेशकों को भी होते हैं साथ ही राजनेताओं को भी होते हैं। नीचे आपको जीडीपी के फायदे बताए गए हैं।

कंपनियां 

ऐसी कंपनी जो नए मार्केट विस्तार की खोज में है वह मार्केट की स्थिति का एनालिसिस करने के लिए जीडीपी से प्राप्त हुए आंकड़े का इस्तेमाल करती है और उसी के पश्चात अपनी आगे की रणनीति तय करती है।

 निवेशक 

निवेशक को इन्वेस्टर भी कहा जाता है। ग्रॉस डॉमेस्टिक प्रोडक्ट से जो आंकड़े प्राप्त होते हैं उसका इस्तेमाल करके निवेशक जिस देश में वह इन्वेस्टमेंट करने के लिए जा रहे हैं, उस देश की इकोनॉमी का एनालिसिस करते हैं।

इसके साथ ही साथ निवेशक जीडीपी के द्वारा ही इस बात का भी पता लगाते हैं कि वर्तमान के समय में कौन सा देश तेजी के साथ तरक्की कर रहा है और कौन सा देश सबसे ज्यादा रिटर्न ओन इन्वेस्टमेंट दे रहा है। इसके पश्चात जो देश सबसे अधिक रिटर्न ओन इन्वेस्टमेंट दे रहा होता है इन्वेस्टर उस देश में पैसा लगाने के बारे में सोचते हैं और आगे की कार्रवाई प्रारंभ करते हैं।

 राजनेता 

हमारे देश के पॉलिटिकल नेताओं के द्वारा देश के विकास के लिए महत्वपूर्ण प्लान को तैयार करने के लिए भी जीडीपी से प्राप्त हुए आंकड़े का इस्तेमाल किया जाता है।

जीडीपी से प्राप्त आंकड़े के द्वारा पॉलिटिकल नेता इस बात को समझने का और जानने का प्रयास करते हैं कि उनका मौजूदा प्लान किस प्रकार से देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है।

जीडीपी के नुकसान क्या है?

जीडीपी के नुकसान अथवा जीडीपी के हानियाँ निम्नानुसार है।

  • काले मार्केट का जो भी ट्रांजैक्शन होता है उसे ग्रॉस डॉमेस्टिक प्रोडक्ट में पब्लिक तौर पर नहीं शामिल किया जाता है, क्योंकि दुनिया में जितने भी देश हैं उन सभी देशों में काले मार्केट का आकार अलग-अलग हो सकता है।
  • कई देश में तो काला मार्केट इतना ज्यादा बड़ा है कि यह उस देश के जीडीपी का महत्वपूर्ण घटक हो जाता है और गैरकानूनी होने की वजह से इसकी कीमत का आकलन करना बहुत ही मुश्किल हो जाता है अथवा असंभव हो जाता है।
  • ऐसी अवस्था में किसी भी कंट्री की जीडीपी उस कंट्री की आर्थिक एक्टिविटी को कम बतला सकती है।
  • जिस प्रकार से टेक्नोलॉजी आगे बढ़ रही है उसी प्रकार से बिजनेस करने वाली कंपनियों के द्वारा कम प्रोडक्शन कॉस्ट पर अच्छी क्वालिटी के सामान तैयार किए जा रहे हैं और यूजर को आनुपातिक रुप से ज्यादा कीमत की पेमेंट किए बिना ही काफी अच्छे प्रोडक्ट का इस्तेमाल करने का आनंद प्राप्त हो रहा है। हालांकि रिलेटिव यूटिलिटी की बढ़ोतरी का मापन करना थोड़ा सा मुश्किल है। इसलिए इस प्रकार की प्रोग्रेस को ग्रॉस डॉमेस्टिक प्रोडक्ट में ऐड नहीं करते हैं।

जीडीपी कैसे बढ़ता है?

जब हमारे भारत देश में पैदा हुई चीजें भारी मात्रा में विदेशों में एक्सपोर्ट की जाती है तो इसकी वजह से भारत में विदेशी मुद्रा भंडार ज्यादा होता है और यही जीडीपी बढ़ने का आधार होता है। हालांकि ग्रॉस डॉमेस्टिक प्रोडक्ट बढ़ने का आधार सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है बल्कि अन्य कई आधार भी है।

किसी भी देश की जीडीपी की दर यह दर्शाती है कि उस देश में कितनी गति के साथ विकास हो रहा है अथवा उस देश की विकास की दर क्या है? जीडीपी के द्वारा ही यह तय किया जाता है कि कौन सा देश विकास दर के मामले में कौन से स्थान पर है। इसके द्वारा ही इस बात की जानकारी हासिल होती है कि हमारे इंडिया में कौन सी चीज का कितना प्रोडक्शन हो रहा है।

अगर देश में जीडीपी अधिक होती है तो इसका मतलब यह होता है कि हमारे देश में प्रोडक्शन ज्यादा हो रहा है जिसकी वजह से लोगों को रोजगार प्राप्त होते हैं और गवर्नमेंट को भी टैक्स मिलता है। इसके अलावा जब देश की जीडीपी अच्छी होती है तो विदेश के लोग भी अधिक पैसे इन्वेस्ट करते हैं।

GDP Kya Hai [Video]

GDP Kya Hai

GDP Kya Hai से सम्बंधित प्रश्न उत्तर {FAQs}

जीडीपी के आधार पर भारत का स्थान कौन सा है?

जीडीपी के आधार पर भारत का स्थान 5वां है।

जीडीपी कौन जारी करता है?

जीडीपी केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय जारी करता है।

2022 में भारत की जीडीपी कितनी है?

147.36 लाख करोड़ रुपये

भारत की जीडीपी क्या है?

भारत की जीडीपी समय-समय पर बदलती रहती है।

जीडीपी किसके लिए अच्छा है?

संपूर्ण देश के लिए

अंतिम शब्द

उम्मीद करते हैं दोस्तों आप सभी को यह आर्टिकल पसंद आया होगा। आज हमने इस आर्टिकल में GDP Kya Hai व जीडीपी का फुल फॉर्म क्या है? इसके बारे में पूरी जानकारी देने की कोशिश की है।

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GDP Kya Hai - जीडीपी का फुल फॉर्म और कैसे बनती है?

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