GST Kya Hai – जीएसटी का फुल फॉर्म और प्रकार {GST in Hindi}

GST Kya Hai : गवर्नमेंट के द्वारा काफी विचार-विमर्श करने के पश्चात हमारे देश में सभी प्रकार के टैक्स को खत्म कर दिया गया और उसकी जगह पर सिर्फ एक ही टैक्स लेने का प्रावधान बनाया गया जिसे जीएसटी का नाम दिया गया। जीएसटी को एकीकृत टैक्स भी कहा जाता है।

क्योंकि इसी के अंदर पहले लिए जाने वाले सभी टैक्स को गवर्नमेंट के द्वारा समाहित कर दिया गया है। इस प्रकार से अब कारोबारियों को जीएसटी टैक्स ही भरना पड़ता है। इससे सामान्य जनता, सरकार और कारोबारी तीनों ही लोगों को फायदा है। आइए इस आर्टिकल में जानते हैं कि “जीएसटी क्या है” और “जीएसटी का फुल फॉर्म क्या है?”

जीएसटी क्या है? (GST Kya Hai)

जीएसटी एक टैक्स है इसे इनडायरेक्ट टैक्स कहा जाता है। जब तक केंद्र सरकार के द्वारा जीएसटी को नहीं बनाया गया था तब तक हमारे भारतीय संविधान के अंतर्गत प्रोडक्ट और सर्विस की बिक्री पर जो टैक्स होते थे उसे लगाने का अधिकार हर राज्य के पास होता था।

वहीं दूसरी तरफ प्रोडक्ट के प्रोडक्शन और सर्विस पर टैक्स लगाने का अधिकार भारत की सेंट्रल गवर्नमेंट के पास मौजूद था और यही कारण था कि सेंट्रल गवर्नमेंट और स्टेट गवर्नमेंट के द्वारा अलग-अलग प्रकार के टैक्स लेने की वजह से लोगों को अलग-अलग टैक्स भरने पड़ते थे जिसकी वजह से उन्हें काफी समस्याओं का सामना भी करना पड़ा था।

इसलिए केंद्र सरकार के द्वारा काफी विचार विमर्श करने के पश्चात सभी प्रकार के टैक्स को खत्म कर दिया गया और सिर्फ एक ही टैक्स को लागू किया गया जिसे जीएसटी का नाम दिया गया जोकि संपूर्ण भारत देश में लागू है। यह टैक्स केंद्र शासित प्रदेशों में भी लागू है।

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GST का फुल फॉर्म

जीएसटी का फुल फॉर्म: “Goods and Service Tax” होता है जबकि हिंदी भाषा में इसे “वस्तु सेवा कर” कहा जाता है।

जीएसटी रिटर्न क्या है?

आपने बिजनेस में जितने भी ट्रांजैक्शन किए हैं उसकी जानकारी लेने के लिए सरकार के द्वारा आपसे जीएसटी रिटर्न भरवाया जाता है, जो कि एक प्रकार का फॉर्म होता है। जीएसटी रिटर्न फॉर्म के अंदर आपको अपने द्वारा की गई सभी खरीदी और बिक्री की जानकारी दर्ज करनी होती है।

इसके अलावा अपने द्वारा काटे गए टैक्स और चुकाए गए टैक्स की भी जानकारी आपको देनी होती है, साथ ही साथ अगर जीएसटी रिटर्न भरने के दरमियान आपने कोई टैक्स नहीं भरा हुआ है तो उसकी भी जानकारी आपको जीएसटी रिटर्न के फॉर्म में डालनी होती है।

जीएसटी के लिए कौन पात्र है?

ऐसे बिजनेसमैन जिन्होंने जीएसटी नंबर ले कर के रखा है उन्हें जीएसटी भरना आवश्यक होता है। हालांकि बिजनेस कैटेगरी के हिसाब से व्यक्ति को अलग-अलग जीएसटी रिटर्न दाखिल करने की आवश्यकता होती है।

जीएसटी कितने प्रकार की होती है?

इंडिया में जीएसटी के प्रमुख 4 प्रकार है। उन चारों प्रकार की इंफॉर्मेशन नीचे बताए अनुसार है।

CGST (केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर)

यह हमारे भारत देश की सेंट्रल गवर्नमेंट का ऐसा भाग है जो सेंट्रल सेलिंग टैक्स, सेंट्रल प्रोडक्ट टैक्स, सर्विस टैक्स के तौर पर इंडियन गवर्नमेंट के पास जाता है। साल 2016 में केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम को बनाया गया था।

SGST (राज्य माल और सेवा कर)

भारतीय सरकार के आदेश पर राज्य माल और सेवा टैक्स का प्रावधान साल 2016 में किया गया जिसके अंतर्गत प्रोडक्ट और सर्विस से संबंधित सेलिंग टैक्स, एंटरटेनमेंट टैक्स, लग्जरी टैक्स, लेवीज ऑन लॉटरी टैक्स और एंट्री टैक्स को शामिल किया गया।

IGST (एकीकृत माल और सेवा कर)

यह टैक्स किसी एक स्टेट से किसी दूसरे स्टेट में चीजों को ले जाने पर लिया जाता है, जिसके अंतर्गत सर्विस की आपूर्ति और इंपोर्ट एक्सपोर्ट को भी शामिल किया गया है। एग्जांपल के तौर पर अगर उत्तर प्रदेश राज्य के द्वारा बिहार राज्य को प्रोडक्ट और सर्विस दी जा रही है तो इस पर एकीकृत माल और सर्विस टैक्स वसूला जाता है।

UTGST (केंद्र शासित प्रदेश के लिए वस्तु और सेवा कर)

भारतीय सरकार ने जीएसटी अधिनियम के अंतर्गत जितने भी केंद्र शासित प्रदेश हैं उन्हें एक अलग ही स्पेशल कैटेगरी में रखा हुआ है और इसीलिए सरकार के द्वारा केंद्र शासित प्रदेश के लिए जो वस्तु और सेवा टैक्स तय किए गए हैं वह सिर्फ केंद्रशासित प्रदेश से ही लिए जाते हैं।

जीएसटी की आवश्यकता क्यों पड़ती है?

हमारे इंडियन कॉन्स्टिट्यूशन में टैक्स से संबंधित जो भी पुराने नियम थे उसके अंतर्गत प्रोडक्ट के प्रोडक्शन और सर्विस पर टैक्स लगाने का अधिकार सिर्फ भारत की सेंट्रल गवर्नमेंट के पास ही था, वहीं दूसरी तरफ प्रोडक्ट की सेलिंग पर टैक्स लगाने का अधिकार स्टेट गवर्नमेंट के पास था।

इस वजह से सेंट्रल गवर्नमेंट और स्टेट गवर्नमेंट के द्वारा अपने-अपने लिए टैक्स बनाए गए और उनकी कैटेगरी का निर्धारण किया गया, जिसकी वजह से एक ही प्रोडक्ट पर दो दो बार व्यक्ति को टैक्स देना पड़ता था और इसीलिए छोटे व्यापारियों को इस समस्या से काफी तकलीफ होती थी।

इसीलिए इन सभी उधेड़बुन से और उलझनो से छुटकारा पाने के लिए सरकार ने लंबे प्रयास के बाद जीएसटी नाम के टैक्स को लागू किया जिसकी वजह से पुराने जो भी टैक्स थे वह सभी खत्म हो गए।

 अब व्यापारियों को सिर्फ एक ही टैक्स भरना पड़ता है जिसे जीएसटी कहां जाता है। जीएसटी टैक्स में ही सारे टैक्स को सरकार के द्वारा समाहित कर दिया गया है। इस प्रकार से व्यापारियों को अलग-अलग प्रकार के टैक्स को भरने के झंझट से मुक्ति मिली।

जीएसटी के लाभ क्या है?

भारत में जीएसटी लागू होने के पश्चात टैक्स सिस्टम में ट्रांसपेरेंसी बढी है। इसका फायदा सामान्य लोगों के अलावा कारोबारियों को भी मिला है साथ ही सरकार को भी मिला है। आइए जीएसटी के प्रमुख एडवांटेज की जानकारी हासिल करते हैं।

सामान्य लोगों के लिए फायदे

  • जीएसटी लागू होने की वजह से सामान्य लोगों को विभिन्न प्रकार के टैक्स से मुक्ति मिल गई है जिसकी वजह से वस्तुओं की कीमतों में भी फर्जी बढ़ोतरी नहीं हो रही है।
  • सरकार के द्वारा ऐसी चीजों पर टैक्स का रेट कम रखा गया है जो जीवन जरूरी चीजों की लिस्ट में आती है। इस प्रकार से सामान्य लोगों को काम की चीजें सस्ती कीमत पर प्राप्त हो रही है जिसकी वजह से कम इनकम वाले लोगों को राहत की प्राप्ति हो रही है।
  • बिजनेस का अधिक से अधिक हिस्सा जीएसटी के दायरे में आ गया जिसकी वजह से सरकार की इनकम में भी बढ़ोतरी होगी जिसका इस्तेमाल गवर्नमेंट परिवहन, हेल्थ, एजुकेशन के लिए करेगी जिससे कहीं ना कहीं आम आदमी को ही फायदा होगा।

व्यवसायियों के लिए फायदे

  • पहले जब हर स्टेट में अलग-अलग टैक्स था तो इसकी वजह से बिजनेस करने वाले लोगों को विभिन्न परेशानी होती थी परंतु अब उन्हें इन सभी झंझट से मुक्ति मिल गई है क्योंकि अब जीएसटी लागू हो गया है जिसकी वजह से उन्हें कारोबार करना काफी आसान लग रहा है।
  • जीएसटी सिस्टम के अंतर्गत बिजनेस से संबंधित जो भी दस्तावेज होते हैं वह सभी ऑनलाइन ही होते हैं जिसकी वजह से सबूतों को तोड़ मरोड़ कर पेश नहीं किया जा सकता।
  • इसके अंतर्गत दस्तावेज खो जाने पर या फिर किसी भी प्रकार की गलती होने पर उसे ऑनलाइन ही सुधारा जा सकता है।

गवर्नमेंट के लिए

  • जीएसटी आने के पहले मार्केट में जो चीजें बेची जाती थी उन्हें तैयार करने से लेकर के उनकी बिक्री तक की सीरीज में बहुत सी जगह पर काम को दिखाया ही नहीं जाता था जिसकी वजह से सरकार को टैक्स प्राप्त नहीं हो पाता था।
  •  परंतु जीएसटी के आने की वजह से छूटे लोग भी टैक्स के अंतर्गत आ जाएंगे और इस प्रकार से टैक्स चोरी होने की संभावना काफी कम होगी जिससे सरकार की इनकम में बढ़ोतरी होगी।
  • सरकार के द्वारा हर स्टेज पर खरीदी गई और बेची गई चीजों की रिसिप्ट का मिलान करवाया जाएगा जिससे सरकार की नजरों से कोई भी व्यक्ति बच नहीं पाएगा।
  • जीएसटी के आने के पहले कुछ राज्य चालाकी करते थे। वह अपने आसपास के राज्यों से कम कीमत पर सामान की तस्करी करते थे और उसे अपने राज्य में ऊंची कीमत पर बेचते थे।  परंतु पूरे भारत देश में जीएसटी लागू होने की वजह से हर राज्य में वस्तुओं का दाम एक हो जाएगा जिसकी वजह से तस्करी पर काफी रोक लगेगी।
  • जीएसटी आने की वजह से टैक्स की संख्या काफी कम हो गई है। इसकी वजह से स्टेट गवर्नमेंट और सेंट्रल गवर्नमेंट के वर्कर और कर्मचारियों पर काम का जो बोझ था उसमें भी कमी आई है।
  • साथ ही साथ रिकवरी की लागत में भी घटोती देखी गई है। इसके अलावा गवर्नमेंट के लिए भी टैक्स के मैनेजमेंट का काम काफी सरल हो गया है।

जीएसटी की हानि क्या है?

जीएसटी के नुकसान निम्नानुसार है।

  • जीएसटी एक प्रकार का आईटी संचालित कानून है। इसलिए जो लोग बिजनेस कर रहे हैं उन्हें अपने ईआरपी सॉफ्टवेयर को अपडेट करने की आवश्यकता है या फिर उन्हें एक नया जीएसटी सॉफ्टवेयर खरीदने की आवश्यकता पड़ेगी ताकि वह अपने बिजनेस को कंटिन्यू रख सकें।
  • जिन लोगों ने अभी तक जीएसटी हासिल नहीं की है उन्हें जल्द से जल्द इसे हासिल करना चाहिए, ताकि वह इसकी बारीकियों को सही प्रकार से समझ सके।
  • जो कंपनियां अलग-अलग राज्यों में काम कर रही है उन्हें सभी राज्यों में जीएसटी के लिए रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ेगा।
  • जीएसटी के लॉन्च होने के पश्चात भारत देश में हेल्थ केयर, कोरियर सर्विस, डीटीएच सर्विस, इंश्योरेंस रिनुअल प्रीमियम जैसी सर्विस थोड़ी सी महंगी हो गई।

GST Kya Hai [Video]

GST Kya Hai

“GST Kya Hai” से सम्बंधित पूछे जाने वाले प्रश्न उत्तर {FAQs}

जीएसटी किस आर्टिकल में है?

जीएसटी 279(A) आर्टिकल में है।

कितने पर्सेंट जीएसटी लगती है?

प्रोडक्ट जिस कैटेगरी में शामिल है उसी के हिसाब से जीएसटी लगेगी।

भारत में जीएसटी कब लागू किया गया था?

भारत में जीएसटी 1 जुलाई 2017 को लागू किया गया था?

जीएसटी का जनक कौन है?

जीएसटी के जनक असीम दासगुप्ता है?

जीएसटी के प्रथम अध्यक्ष कौन थे?

जीएसटी के प्रथम अध्यक्ष वित्त मंत्री अरुण जेटली थे?

जीएसटी बनवाने में कितना खर्च आता है?

जीएसटी पंजीकरण का चार्ज नहीं है।

क्या खाली जमीन पर जीएसटी दे‌‌य है?

संभावित नहीं

जीएसटी नहीं भरने पर क्या होता है?

रोजाना ₹50 की पेनल्टी फीस, बैंक अकाउंट फ्रीज

अंतिम शब्द

उम्मीद करते हैं दोस्तों आप सभी को यह आर्टिकल पसंद आया होगा। तो आज हमने “GST Kya Hai” के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देने की कोशिश की है।

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GST Kya Hai - जीएसटी का फुल फॉर्म और प्रकार {GST in Hindi}

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